सिद्धार्थ: एक मजरूह सी रूह
एक मजरूह सी रूह को अपने सीने पे उठाए मैं दायम हर नफस मसीहा के दर पर उम्मीद-ऐ-मसीहाई का मुन्तज़िर भी...
एक मजरूह सी रूह को अपने सीने पे उठाए मैं दायम हर नफस मसीहा के दर पर उम्मीद-ऐ-मसीहाई का मुन्तज़िर भी...
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