पहाड़ों की चढाई
हम बहुत रह चुके यारों, शहरों के कारागारों में, बसे भीड़ में, धक्के खाते, खड़े रहे कतारों में! करे घोंसले बहुतेरे, महलो में, परिंद...
हम बहुत रह चुके यारों, शहरों के कारागारों में, बसे भीड़ में, धक्के खाते, खड़े रहे कतारों में! करे घोंसले बहुतेरे, महलो में, परिंद...
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