ख्यालात: जंगली हूं, जंगली रहने दो...
लोगों को शायद पता नहीं.. जंगली घोड़े की नाक मे नकेल डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिये.... वो तुम्हारे बनाए दायरे के हिसाब से नही...
लोगों को शायद पता नहीं.. जंगली घोड़े की नाक मे नकेल डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिये.... वो तुम्हारे बनाए दायरे के हिसाब से नही...
निर्मोही से प्रीत लगा मोह फिर क्यूँ बो रहा? मलंग तू, फ़कीर तू आज फिर क्यूँ रो रहा? फिर बोझ हृदय पर क्यूँ भारी सा रखा है ? निज...
For a very long time I have longed to talk to You. Longed, because There is a taste in my mouth, That may not be true. Now that I have...
कर्फू लगा शहर में देखो नाचें पी मतवाले क्यों ? जो उल्टा हमको ही काटें ऐसे कुत्ते पाले क्यों ? पीर परायी बसाई दिल में फिर ये चीख औ न...
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